नई दिल्ली। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में रविवार 8 मार्च को खेले गए टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में भारतीय युवा बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने ऐसा धमाका किया, जिसकी उम्मीद शायद ही किसी आलोचक ने की होगी। पूरे टूर्नामेंट में रनों के लिए संघर्ष कर रहे अभिषेक ने फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में शानदार वापसी करते हुए न्यूजीलैंड के खिलाफ महज 21 गेंदों में 52 रन की विस्फोटक पारी खेल दी। उनकी इस पारी ने मैच का रुख ही बदल दिया और दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
उधार के बल्ले से मचाई तबाही
अभिषेक शर्मा की इस यादगार पारी के पीछे एक दिलचस्प कहानी भी सामने आई है। मैच के बाद उन्होंने खुद खुलासा किया कि फाइनल की सुबह उन्होंने कुछ नया करने का फैसला किया था। उस समय कप्तान शुभमन गिल उनके पास नहीं थे, इसलिए अभिषेक ने ऑलराउंडर शिवम दुबे से उनका बल्ला उधार ले लिया।
इसी बल्ले से अभिषेक ने मैदान पर उतरते ही कीवी गेंदबाजों पर हमला बोल दिया। उन्होंने 21 गेंदों में 52 रन की तूफानी पारी खेली, जिसमें 6 चौके और 3 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। खास बात यह रही कि उन्होंने केवल 18 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया, जो टी20 वर्ल्ड कप फाइनल के इतिहास की सबसे तेज फिफ्टी बन गई। इसके साथ ही यह पूरे टूर्नामेंट के इतिहास की संयुक्त रूप से तीसरी सबसे तेज पारी भी दर्ज हुई।
पावरप्ले में ही मैच का रुख बदल दिया
अभिषेक शर्मा ने संजू सैमसन के साथ मिलकर भारतीय टीम को बेहद आक्रामक शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने पावरप्ले के शुरुआती छह ओवरों में ही 96 रन जोड़ दिए। यह स्कोर टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में संयुक्त रूप से सबसे बड़ा पावरप्ले स्कोर माना जा रहा है।
इस तेज शुरुआत ने भारत को बड़े स्कोर की मजबूत नींव दी और न्यूजीलैंड की गेंदबाजी पूरी तरह दबाव में आ गई।
तीन डक के बाद फाइनल में चमके अभिषेक
फाइनल से पहले अभिषेक शर्मा का सफर काफी कठिन रहा था। टूर्नामेंट की शुरुआती तीन पारियों में वे खाता भी नहीं खोल पाए थे और लगातार तीन बार शून्य पर आउट हुए थे। इसके बाद उनकी जगह टीम में खतरे में पड़ गई थी और चारों तरफ उनकी आलोचना भी हो रही थी।
हालांकि टीम प्रबंधन और खिलाड़ियों ने उन पर भरोसा बनाए रखा। अभिषेक ने भी अपनी इस ऐतिहासिक पारी का श्रेय टीम के इसी भरोसे को दिया। उन्होंने कहा कि जब वे रन नहीं बना पा रहे थे तब भी साथियों ने उनका हौसला बढ़ाया और विश्वास जताया कि वे बड़े मैच के खिलाड़ी हैं। आखिरकार फाइनल में उन्होंने वही कर दिखाया और साबित कर दिया कि असली खिलाड़ी वही होता है जो सबसे मुश्किल समय में खुद को साबित करता है।
